अब नहीं छिपा सकेंगे अपनी पत्नी से वेतन, हाई कोर्ट ने जारी किये आदेश

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बीएसएनएल में सीनियर अधिकारी पवन कुमार जैन द्वारा पत्नी को मात्र 7 हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जा रहा था। इसको लेकर पत्नी सुनीता ने पहले सूचना का अधिकार के तहत बीएसएनएल में आवेदन देकर पति की पे-स्लिप की मांग की, लेकिन विभाग ने देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद सुनीता अपील में भी गईं लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार सुनीता ने केन्द्रीय सूचना आयोग को आवेदन दिया, जिसके आधार पर 27 मई 2007 को केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी ने बीएसएनएल से पवन कुमार जैन की सेलरी स्लिप देने के निर्देश दिए। इस निर्देश के खिलाफ पवन कुमार और बीएसएनएल ने हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर दी मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने करते हुए केन्द्रीय सूचना आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया। सिंगल बेंच के इस आदेश को सुनीता ने हाई कोर्ट की डबल बैंच में चुनौती दी। करीब तीन साल तक चली सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने केन्द्रीय सूचना आयोग के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि किसी तीसरे आदमी को विभाग वेतन की जानकारी देने से मना कर सकता है लेकिन पत्नी को पति के वेतन के बारे में जानने का पूरा अधिकार है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता केसी घिल्डियाल ने पैरवी की।

बीएसएनएल में सीनियर अधिकारी के पद पर कार्यरत पति का वेतन जानने के लिए पत्नी को 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस एसके सेठ और जस्टिस नंदिता दुबे की खंडपीठ ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया कि पत्नी को पति के वेतन के बारे में जानने का कानूनी अधिकार है।